भारतीय काल गणना की वैज्ञानिकता पर रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में गूंजा भारतीय ज्ञान परंपरा का स

प्रेस विज्ञप्ति

“भारतीय काल गणना की वैज्ञानिकता पर रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में गूंजा भारतीय ज्ञान परंपरा का स्वर”

जंतर-मंतर से आधुनिक विज्ञान तक—प्राचीन समय-गणना की सटीकता पर हुआ सारगर्भित विमर्श

भोपाल। रबींद्रनाथ टैगोर विश्ववोद्यालय भोपाल में भारतीय नववर्ष के पावन अवसर पर “भारतीय नववर्ष एवं भारतीय काल गणना की वैज्ञानिकता” विषय पर एक भव्य एवं ज्ञानवर्धक व्याख्यान का आयोजन कथा सभागार में किया गया। कार्यक्रम का आयोजन संस्कृत, प्राच्य भाषा एवं भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र, मानविकी एवं उदार कला संकाय तथा विश्व रंग फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुआ। 

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री दीपक शर्मा ने अपने विस्तृत एवं शोधपरक व्याख्यान में भारतीय काल गणना प्रणाली को पावरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से अत्यंत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने जंतर मंतर से प्राप्त खगोलीय उपकरणों एवं संरचनाओं की तस्वीरों के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि प्राचीन भारत में समय-गणना केवल परंपरा नहीं, बल्कि खगोल विज्ञान और गणितीय सटीकता पर आधारित एक विकसित वैज्ञानिक प्रणाली थी।

उन्होंने ‘युगाब्द’ एवं ‘होरा’ जैसे सूक्ष्म समय-मानकों की विस्तार से व्याख्या करते हुए बताया कि भारतीय काल गणना पद्धति अत्यंत वैज्ञानिक एवं सुसंगत है। साथ ही उन्होंने उपनिवेशवादी काल में अंग्रेजों की नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को कमजोर करने के प्रयास किए गए, किंतु इसकी प्रासंगिकता आज भी अक्षुण्ण बनी हुई है। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. अमिताभ सक्सेना ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा में काल गणना को वर्तमान समय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम के शुभारंभ में डॉ. सावित्री सिंह परिहार द्वारा अतिथियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शैलेन्द्र सिंह द्वारा किया गया, जिन्होंने पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित एवं प्रभावशाली रूप से आगे बढ़ाया। अंत में आभार प्रदर्शन कुलसचिव डॉ. संगीता जौहरी द्वारा किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

जनसंपर्क विभाग


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